नॉर्थ MCD कर्मचारियों की दीपावली रहेगी फीकी? महीनों से सैलरी अटकी.

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दिल्ली में दीपावली पर नॉर्थ एमसीडी के हजारों कर्मचारियों का त्योहार फीका पड़ने वाला है. दरअसल नॉर्थ एमसीडी में ग्रुप डी के कर्मचारियों को छोड़कर बाकी तकरीबन 10 हजार कर्मचारियों को पिछले 2-3 महीने की तनख्वाह नहीं मिली है.

 

  • कमिश्नर को 2 महीने से तनख्वाह नहीं मिली
  • एमसीडी के 10 हजार कर्मचारियों पर असर है

दिल्ली में दीपावली पर नॉर्थ एमसीडी के हजारों कर्मचारियों का त्योहार फीका पड़ने वाला है. दरअसल नॉर्थ एमसीडी में ग्रुप डी के कर्मचारियों को छोड़कर बाकी तकरीबन 10 हजार कर्मचारियों को पिछले 2-3 महीने की तनख्वाह नहीं मिली है.

तनख्वाह न पाने वालों में दिल्ली नॉर्थ एमसीडी के ज्यादातर डॉक्टर, इंजीनियर, नर्सेज, टीचर्स, टेक्निकल स्टाफ आदि शामिल हैं. कमिश्नर ने बीते दिनों ट्वीट करके बताया कि उन्हें खुद 2 महीने से तनख्वाह नहीं मिली है. लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि नॉर्थ एमसीडी ने सैलरी को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं.

नॉर्थ एमसीडी में स्थाई समिति के चेयरमैन जयप्रकाश कहते हैं कि यह बेहद अफसोसजनक है कि नगर निगम अपने कर्मचारियों को त्योहार के वक्त सैलरी नहीं दे पा रहा है. लेकिन नगर निगम मजबूर है क्योंकि केजरीवाल सरकार ने इनके हिस्से का फंड जारी नहीं किया है.

अब जयप्रकाश कहते हैं कि अगर त्योहार के पहले फंड जारी नहीं हुआ तो मजबूरन एमसीडी के सभी नेताओं को केजरीवाल के घर पर धरना देना पड़ेगा. लेकिन नॉर्थ एमसीडी में आम आदमी पार्टी के पार्षद और नेता विपक्ष नगर निगम के इस दावे को पूरी तरह से बेबुनियाद करार दे रहे हैं.

नेता विपक्ष की दलील

नेता विपक्ष सुरजीत पवार ने कहा कि नगर निगम को बीते कई वर्षों के मुकाबले केजरीवाल सरकार ने ज्यादा फंड दिया है. इसके अलावा नगर निगम को डीडीए और दूसरे अपने ही विभागों से 4000 करोड़ रुपए का बकाया वापस लेना है. सुरजीत पवार ने कहा कि अगर नगर निगम केजरीवाल पर आरोप लगाना छोड़ कर अपना बकाया पैसा दूसरे विभागों से ले ले तब भी निगम के बाद बहुत पैसा होगा. हालांकि नगर निगम और केजरीवाल सरकार के बीच खींचतान नई नहीं है, लेकिन इतना तो तय है कि एक बार फिर से इस लड़ाई का नुकसान आम कर्मचारियों को उठाना पड़ेगा.

एमसीडी के आदेश से बढ़ा विवाद

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली नगर निगम का एक ऑर्डर विवाद की जड़ बन गया है. इस आदेश में कहा गया है कि दिल्ली में कोई भी सड़क निर्माण चाहे विधायक निधि से हो या फिर मुख्यमंत्री सड़क योजना से हो, उसके लिए स्थानीय पार्षद से सहमति लेना जरूरी है. साथ ही सड़क निर्माण के बाद शिला पट्टिका में पार्षद का नाम दर्ज कराना भी जरूरी है.

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इस आदेश पर आम आदमी पार्टी के काउंसलर बेहद नाराज दिखे. नॉर्थ एमसीडी में नेता विपक्ष सुरजीत पवार ने कहा कि केजरीवाल सरकार बेहद तेजी से दिल्ली का विकास कार्य कर रही है. दिल्ली की हर सड़क को सरकार बना रही है. ऐसे में नगर निगम चाहता है कि केजरीवाल सरकार के कामों से उसको भी लाभ मिल जाए. इसलिए इस तरह का ऑर्डर निकाला गया है.

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