दिल्ली विधानसभा चुनाव: सांसदों को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में बीजेपी?

Spread the love

दिल्ली में सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सांसद पद से इस्तीफा भी नहीं देना पड़ेगा, क्योंकि 6 महीने का वक्त  मिलता है. वैसे तो हर सांसद के अपने संसदीय क्षेत्र में 10 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिसमें हर सांसद को अपने अपने क्षेत्रों में पार्टी को जीत दिलाने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है.

  • दिल्ली में विधानसभा चुनावों को लेकर एक्शन मोड में बीजेपी
  • सांसदों को मिल सकती है चुनावी कमान की जिम्मेदारी
  • सीएम चेहरे पर चुनाव के बाद ही पार्टी करेगी फैसला

दिल्ली में विधानसभा चुनाव बेहद नजदीक हैं. विधानसभा चुनाव 2020 में 21 साल से दूर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस बार किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहती है. कांग्रेस की ही तरह बीजेपी भी अंदरुनी कलह का शिकार है. शीर्ष पार्टी नेतृत्व के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं की राय से लेकर मुख्यमंत्री के चेहरे और पार्टी के अंदर की गुटबाजी खत्म करने की भी चुनौती है. बीजेपी दिल्ली में भी जीत हासिल करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है.

बीजेपी चुनाव जीतने के लिए अलग-अलग रणनीति पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस बार सांसदों को मैदान में उतारने पर विचार कर रही है, जिसमें राज्यसभा से सांसद और दिल्ली बीजेपी के सीनियर नेता विजय गोयल का नाम भी सामने आ रहा है. विजय गोयल का राज्यसभा कार्यकाल अगले साल खत्म हो रहा है. वहीं पूर्वी दिल्ली से पूर्व सांसद महेश गिरी को भी उतारने पर विचार किया जा रहा है. जबकि दिल्ली बीजेपी के सांसदों को लेकर दावेदार शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है.

दरसअल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पार्टी सांसदों के बीच आपसी खींचतान हो या फिर सीएम पद को लेकर दावेदारी का सवाल, इसके लिए पार्टी दिल्ली बीजेपी के सांसदों से दावेदारी को लेकर विधानसभा चुनाव लड़ने को कह सकती है. जो भी सांसद अपने आप को सीएम पद का दावेदार मानते हैं, उनको विधानसभा का चुनाव लड़ने को कहा जा सकता है. फिलहाल दिल्ली बीजेपी के सांसदों से चुनाव लड़ने को नहीं कहा गया है लेकिन उनकी कोई दावेदारी सामने आती है तो फिर उनको भी विधानसभा का चुनाव लड़ने को कहा जा सकता है.

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को लगता है कि ऐसा करने से दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सांसद और सीएम पद को लेकर आपसी खींचतान भी कम हो जाएगी और सब मिलकर चुनाव जीतने के लिए काम करेंगे. चुनाव जीतने बाद पार्टी आलाकमान तय करेगी कि आखिर कौन बनेगा सीएम.

चूंकि सांसदों को विधानसभा चुनाव लडने के लिए सांसद पद से इस्तीफा भी नहीं देना पड़ेगा, क्योंकि 6 महीने का वक्त  मिलता है. वैसे तो हर सांसद के अपने संसदीय क्षेत्र में 10 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिसमें हर सांसद को अपने अपने क्षेत्रों में पार्टी को जीत दिलाने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है.

दरअसल पार्टी के नेता भी मानते हैं कि जब-जब दिल्ली विधानसभा चुनाव में सीएम चेहरे के साथ उतरी है पार्टी को हार मिली है और एक बार मौका भी मिला लेकिन बहुमत नहीं मिल पाया, इसलिए बिना सीएम चेहरे के ही उतरना चाहिए.  वहीं दिल्ली बीजेपी में पार्टी कार्यकर्ता मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने का सुझाव दे चुके हैं लेकिन 2024 के पार्टी तैयारियों को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी को चेहरा बनाना है या नहीं, इसपर भी फैसला पार्टी आलाकमान को करना है. पार्टी कमल निशान और कुछ बड़े चेहरे के साथ मैदान में उतरना चाहती है. चुनाव जीतने बाद कौन बनेगा मुख्यमंत्री, इस पर पार्टी आलाकमान ही फैसला करेगा.फिलहाल इस मुद्दे पर कोई भी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. सांसदों को लेकर पूछे गए सवाल पर दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इसका खंडन किया और कहा, मुझे इसकी जानकारी नहीं है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *